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अगर स्वतंत्र भारत के पहले प्रधान मंत्री श्री सुभाष चन्द्र बोस होते तो क्या होता

अगर आपने पुरानी फोटो देखी होगी सुभाष जी की इंटरनेट पर तब आप जान पाएंगे सुभाष जी कितने बड़े नेता थे । कम उम्र में ही आईएएस तक बन गए थे । और देश की

भारत महान देश क्यों है ।
सैनिक

अगर आपने पुरानी फोटो देखी होगी सुभाष जी की इंटरनेट पर तब आप जान पाएंगे सुभाष जी कितने बड़े नेता थे । कम उम्र में ही आईएएस तक बन गए थे । और देश की सेवा करने के लिए अंग्रेजो की गुलामी तक स्वीकार नहीं की थी उन्होंने वो कांग्रेस के प्रेसिडेंट भी रहे थे। उनको हमेशा जनता का अपार समर्थन मिलता था और 1947 के समय सुभाष बाबू अगर भारत में ही होते तो निश्चित रूप से उनको कोई ना कोई पद जरूर मिलता उनकी देश प्रेम से ओतप्रोत एक से एक कथाएं आज भी विद्यमान है।

आजादी के मतवालों में इसीलिए उनका नाम अग्रणी सम्मान पूर्वक लिया जाता है अगर सुभाष जी होते तो पहले प्रधानमंत्री तो शायद भारत आज इजरायल जैसा टेक्नोलॉजी में भी आगे होता क्यों की सुभाष बाबू एक कुशल प्रशासक थे ।

वो भारत के लोगो की नब्ज को पकड़ना जानते थे ।

उन्होंने तो 5000 तक का नोट भी चला दिया था और बैंक तक बना दिया आजादी से पहले ही भारत के नाम से सुभाष चन्द्र बोस जी ने ही जय हिन्द का नारा दिया था । मै यहां नेहरू जी की बुराई नहीं कर रहा हूं वो भी अपने समय के अच्छे प्रधानमंत्री थे ये लेख बस कल्पना पर आधारित है लेकिन सुभाष चन्द्र बोस जी को भी नेहरू जी जितनी ही ख्याति प्राप्त थी ।

सुभाष चन्द्र बोस जी ने आजाद हिन्द फौज नाम की सेना भी बनाई थी वो ये सोचते थे अंग्रेज अहिंसा से नहीं भागे अगर तो अपना हक लड़ कर भी लिया जा सकता है उनकी इस बात से ही गांधी जी ने उनसे कहा था नहीं सुभाष ऐसा नहीं है तो सुभाष जी ने भी फिर कहा था बापू रास्ते ही तो अलग हो सकते है हमारे लेकिन मंजिल तो एक ही है सुभाष चन्द्र बोस जी ने रूस जर्मनी जाकर भी भारी समर्थन हासिल किया था और उनकी आजाद हिंदू फौज ने कई युद्ध लडे थे इस बार उनकी जन्मशताब्दी पर 23 जनवरी को मोदी सरकार ने पराक्रम दिवस भी मनाया था ।

वो राजनेता के साथ साथ एक दूरगामी सोच भी रखते थे उनका जन्म 23 जनवरी 1869 को बंगाल में हुआ था । अंग्रेज़ शासक उनसे बहुत डरते थे तो अगर वे भारत के प्रथम प्रधामंत्री होते थे तो ये भी हो सकता है आज भारत की नई तस्वीर होती । 1921 से 1941 नेता जी 11 बार जेल में गए थे 1941 में तो उन्हें नजरबंद ही कर दिया था घर में फिर वहां से वे पेशावर होते हुए कबूल से जर्मनी तक पहुंच गए थे वहां जाकर उन्होंने इंडिया रेडियो फ्री सेंटर की स्थापना भी की थी।

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