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केवली कुंभक

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केवल कुंभक क्या है ।

तीनो बंध का समावेश क्या है ।

लाभ क्या है ।

केवली कुंभक का अर्थ है रेचक पूरक बिना ही प्राण का स्थिर हो जाना इसको केवली कुंभक सिद्ध होता है उस योगी के लिए तीनो लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता कुंडलिनी जागृत होती है

लाभ क्या है ?

शरीर पतला हो जाता है मुख प्रसन्न रहता है नेत्र मल रहित होते हैं सर्व रोग दूर होते हैं बिंदु पर विजय होती है जट रागनी प्रज्वलित होती है
केवल कुंभक सिद्ध किए हुए योगी की अपनी सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

तीनो बंध का समावेश क्या है ।

इतना नहीं उसका पूजन करके सभी लोग भी अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने लगते हैं जो साधक पूर्ण एकाग्रता से त्रिबंध सहित प्रणायाम के अभ्यास द्वारा केवल कुंभक का पुरुषार्थ सिद्ध करता है

उसके भाग्य का तो पूछना है क्या उसकी व्यापकता बढ़ जाती है अंतर में महानता का अनुभव होता है काम क्रोध लोभ मोह मद और मत्सर इन 6 शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती हैं केवल कुंभक की महिमा अपार है

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