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क्यों ना सिद्धासन करे ?

पद्मासन के बाद सिद्धासन का स्थान आता है अलौकिक सिद्धियां प्रदान करने वाला होने के कारण इसका नाम सिद्धासन पड़ा है सिद्धि योग योग का यह प्रिय आसन है यम

योगासन कैसे करे
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पद्मासन के बाद सिद्धासन का स्थान आता है अलौकिक सिद्धियां प्रदान करने वाला होने के कारण इसका नाम सिद्धासन पड़ा है सिद्धि योग योग का यह प्रिय आसन है यमो में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठा है नियमो में शौच श्रेष्ठ है वैसे ही आसनों में सिद्धासन श्रेष्ठ है ध्यान आज्ञा चक्र में और स्वास्थ्य के स्वभाविक है

विधि :-आसन पर बैठकर पैर खुले छोड़ दे अब बाएं पैर की एड़ी को गुदा और जननेंद्रिय के बीच रखें दाहिने पैर की एड़ी को जनेड्रिया के ऊपर इस प्रकार रखें जिससे जिनेंद्र या और अंडकोष के ऊपर दबाव न पड़े पैरों का क्रम बदल भी सकते हैं दोनों पैरों के तलवे जंघा के मध्य में रहे हथेली ऊपर की ओर रहे

इस प्रकार दोनों हाथ एक दूसरे के ऊपर गोद में रखें अथवा दोनों हाथों को दोनों घुटनों के ऊपर ज्ञान मुद्रा में रखें आंखें खुली अथवा बंद रखें सवाश आराम से छोड़ सो भाविक चलने दे

आज्ञा चक्र में ध्यान केंद्रित करें 5 मिनट से लेकर 3 घंटे तक इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं ध्यान की उच्च कक्षा आने पर शरीर पर से मन की पकड़ छूट जाती है

लाभ सिद्धासन के अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है प्राण तत्व स्वभाविक त्या उठवा गति को प्राप्त होता है फलत है मन को एकाग्र करना सरल बनता है पाचन क्रिया नियमित होती है समाज के रोग हृदय रोग जीर्ण ज्वर अधीन अतिसार शुक्र दोष आदि दूर होते हैं मदानी मरोड़ा संग्रहणी वात विकार से दमा मधुपुर एमलिया की वृद्धि आदि अनेक रोगों का शमन होता है

पद्मासन के अभ्यास से जो रोग दूर होते हैं वह सीधे आसन के अभ्यास से भी दूर होते हैं और पद्मासन के अभ्यास से जो लाभ होते हैं वह सिद्धासन के अभ्यास से भी होते हैं ब्रह्मचर्य पालन में यह आसन विशेष रूप से सहायक होता है विचार पवित्र बनते हैं मन एकाग्र होता है सिद्धासन का अभ्यास भोग विलास से बचा सकता है

72 गाड़ियों का मल इस आसन के अभ्यास से दूर होता है वीर्य की रक्षा होती है स्वपनदोष के रोगी को यह आसन अवश्य करना चाहिए योग से वीर्य के द्वारा उसको मस्त की ओर ले जाते हैं और दिव्यता का अनुभव कराता है मानसिक शक्तियों का विकास होता है कुंडलिनी शक्ति जागृत करने के लिए यह आसन प्रथम सोपान है सिद्धासन में बैठकर जो कुछ पढ़ा जाता है वह अच्छी तरह से याद रह जाता है

विद्यार्थियों के लिए विशेष लाभदायक है तेज होती है दिमाग शक्ति बढ़ती है आत्मा का ध्यान करने वाला योगी यदि बिहारी बनकर 12 वर्ष से आसन का अभ्यास करें तो सिद्धि को प्राप्त होता है होने के बाद अन्य आसनों का कोई प्रयोजन नहीं रहता सिद्धासन से केवल या केवली कुंभक सिद्ध होता है छह मास में भी केवली कुंभक सिद्ध हो सकता है ऐसे सिद्ध योगी के दर्शन पूजन से पाठक नष्ट होते हैं मनोकामना पूर्ण होती है दर्शन के प्रताप से निर्मित समाधि सिद्ध होती है मूलबंध उद्यानबंध और लंदन में अपने आप होने लगते हैं

सिद्धासन जैसा दूसरा आसान नहीं है केवल कुंभ के समान प्रणाम नहीं है केजरी के समान अन्य मुद्रा नहीं है और अनाहत नाद जैसा कोई नहीं है सिद्धासन महापुरुषों का आसन है सामान्य व्यक्ति हट पूर्वक इसका उपयोग ना करें अन्यथा लाभ के बदले हानि होने की संभावना है

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