गर्भवती महिलाओं के लिए पर दादी के नुस्खे

तुलसी के बीज में जो लेपक गुण होता है और वह पुरुषों की जननेन्द्रिय संबंधी रोगों में भी विशेष लाभदायक सिद्ध होता है कुछ लोगो का तो ऐसा विश्वास है तुलसी स्त्री वाचक पोधा है और कथाओं में उसे विष्णु प्रिय भी कहा जाता है इससे वह स्त्री रोगों को दूर करने और उनके स्वास्थ्य वर्धन में बहुत उपयोगी है।

1.स्त्रियों के मासिक धर्म रुकने पर तुलसी के बीजों का प्रयोग लाभदायक होता है तुलसी पंचांग ( पत्ते मंजरी बीज लकड़ी और जड़ ) सोंठ नींबू की छाल का गूदा अजवायन और तालिस पत्र इन सबका जोकुट इनमें से एक तोला लेकर पाव भर पानी में काढ़ा बनावे जब चोथाई पानी रह जाए तो छानकर पी ले कुछ समय तक यह प्रयोग करने से मासिक धर्म खुल जाएगा

2. यदि रजो दर्शन मासिक धर्म के होने पर तुलसी के पत्तो का काढ़ा बना तीन दिन तक पी लिया जाए तो गर्भ संभावना कम हो जाती है यह प्रयोग गर्भ निरोध की दृष्टि से विशेष उपयोगी है क्युकी यह प्रजनन अंगों को नुक्सान नहीं पहुंचता है और उनको शुधरहित और दोष रहित करके शक्तिशाली बना देता है

3.तुलसी का विविधपुरवक प्रयोग करने से और श्रद्धापूर्वक पूजन करने से शारीरिक और मानसिक दोष दूर हो कर प्रजनन अंग गर्भ धारण के योग्य हो जाता है उस अवस्था में पत्तो के काढ़े के बजाय बिजो को चूर्ण और शर्बत भी उपयोगी होता है ।

4. गर्भ धारण करने वाली स्त्री की छाती और पेट की खुजली के लिए वन तुलसी के बीजों का लेप करने से आराम होता है ।

5. तुलसी के बीज और आमा हल्दी समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर जननेन्द्रिय पर छिड़कने से योनिभ्रश जननेन्द्रिय का स्थान ठीक हो जाने की स्थिति में लाभप्रद होता है ।

6. ग्रभावस्था में पेट पर जो दरार पड़ती है जिससे कभी कभी खुजली लगने लगती है वहां तुलसी के पत्ते पीसकर पुल्टिस सी बनाकर मलने से ठीक हो जाता है

7.तुलसी के रस में जीरा पीसकर उसे गाय के धारोष्ण दूध के साथ सेवन किया जाए तो प्रदर रोगों में सुधार होकर स्त्री का स्वस्थ्य ठीक हो जाता है।

8.प्रसव के समय त्रीव वेदना होने पर तुलसी का रस एक तोला पिलाने से लाभ होता है गर्भावस्था में शिशु के बाहर निकलने में सरलता आती है तुलसी की जड़ को को स्त्री की कमर में बंधने से प्रसव का दर्द मिटकर संतान सुखपूर्वक होती है।