जलनेति क्रिया क्या है ।

Table of content

1. विधि ।

pic credit medicircle

2.लाभ क्या है ।

एक लीटर पानी को गुनगुना सा गरम करे । उसमे करीब दस ग्राम शुद्ध नमक डाल कर घोल दे ।

सेंधवा नमक मिल जाए तो और भी बहुत अच्छा होता है।

सुबह में स्नान के बाद यह पानी चौड़े मुहवाले पात्र में

कटोरे में लेकर पैरो पर बैठ जाए । पात्र को दोनों हाथों से पकड़ कर नाक के नथुने पानी में डूबा दे । अब धीरे धीरे नाक के द्वारा श्वास के साथ पानी को भीतर खिचे और नाक से भीतर आते हुए पानी को मुंह से बाहर निकालते जाए ।

नाक को पानी में इस प्रकार बराबर डुबाए रखे । जिससे नाक द्वारा भीतर जाने वाले पानी के साथ हवा प्रवेश ना करे । अन्यथा आत्रश खासी आएगी ।

इस प्रकार पात्र का सब पानी नाक द्वारा लेकर मुख द्वारा बाहर निकाल दे । अब पात्र को रखकर खड़े हो जाए । दोनों पैर थोड़े खुले रहे ।

दोनों हाथो कमर पर रखकर खड़े हो जाए श्वास को जोर से बाहर निकालते हुए आगे की और जितना हो सके उतना झुके । भाश्रिका के साथ यह क्रिया बार बार करे ।

इससे नाक के भीतर का सब पानी बाहर निकल जाएगा । थोड़ा बहुत रह भी जाए और दिन में नाक से बाहर निकल आए तो कुछ चिंताजनक नहीं है ।

नाक से पानी भीतर खिचने की यह क्रिया प्रारंभ में उलझन जैसी लगेगी लेकिन अभ्यास हो जाने पर बिल्कुल सरल बन जाएगी ।

लाभ :

मतिष्क की ओर से एक प्रकार का विषेला रस नीचे की ओर बहता है यह रस कान मे आए तो कान के रोग होते है । आदमी बेहरा हो जाता है ।

यह रस आंखो की और आए तो आंखो का तेज कम हो जाता है। चस्मे की जरूरत पड़ती है तथा अन्य रोग होते है यह रस गले की ओर जाए तो गले के रोग होते है।

नियमपूर्वक जलनेति करने से यह विषैला पदार्थ बाहर निकल जाता है । आंखो की रोशनी बढ़ती है । चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती है चश्मा हो भी तो धीरे धीरे नम्बर कम होते होते छूट जाता है ।

श्वास का मार्ग साफ हो जाता है । मस्तिष्क में ताजगी रहती है ।

जुखाम सर्दी होने के अवसर कम हो जाते है ।

जलनेति क्रिया करने से दमा टीवी खासी नकसीर बहरापन आदि छोटी मोटी 1500 बीमारियां दूर होती है । जलनेति करनेवाले को बहुत लाभ होते है चित्त में प्रशंत्ता बढ़ती है।