Site icon GoFuFa

ज्ञान और कर्म क्या है विस्तार से समझे

ज्ञान योग और कर्म योग दोनों मे कर्म तो करना पड़ेगा ही।

सन्यास मार्ग ही ज्ञान योग है इसका मतलब ज्ञान प्राप्त करने के लिए सन्यास लेना पड़ता है

फिर भी कर्म करना पड़ता है जबकि इसके अपितु कर्म योग निष्काम किया जाता है

प्रश्न ये है कौन श्रेष्ट है ज्ञान मार्ग या कर्म मार्ग। लेकिन जिसमे राग देष मोह बंधन नहीं है।

वो सन्यास योग ही तो है।कर्म योग मे निष्काम बिना फल की इच्छा के अपने कर्म मे लगा रहता है

तो दोनों एक ही तो है ज्ञान योग भी बिना कर्म योग के सफल नहीं हो सकते है

अपने देव की साधना भी करोगे तब भी तो कर्म करना पड़ेगा ही।कर्म करके ही सन्यास को पाया जा सकता है।

सन्यास में आराधना भी तो कर्म से ही होती है। बिना कर्म तो शरीर तक साथ देना छोड़ जाता है

इसकी विशेष व्याख्या गीता मे भी कही गयी है। तब ही तो कर्म ही पूजा कहा गया है

ऐसे ही तो मानव के कर्म परमात्मा मे विलय हो जाते है। मानव भविष्य कर्म से ही तो निरधारण होता है।

Exit mobile version