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तुलसी करे निरोगी

जब से संसार में सभ्यता का उदय हुआ है मनुष्य रोग और औषधि दोनों शब्दों को दिन प्रति दिन सुनते आए है । आज के आधुनिक युग में हर आदमी दवाई खाता है। जब

तुलसी के लाभ
वीर्य रक्षा कैसे करे और शारीरिक बल प्राप्त करे कैसे ?
तुलसी से खाज खुजली दूर करे

जब से संसार में सभ्यता का उदय हुआ है मनुष्य रोग और औषधि दोनों शब्दों को दिन प्रति दिन सुनते आए है । आज के आधुनिक युग में हर आदमी दवाई खाता है। जब भी हमें अपने शरीर में विकारों का भाव होता है एक दम डॉक्टर या मेडिकल स्टोर की तरफ दौड़ पड़ते है ऐसे ही मै आज आपको भारतीय परम्परा की सबसे अच्छी और पुरानी दवाई के बारे में बताऊंगा। जिसका सदियों से भारत में उपयोग होता है पहले के समय में तो इसका अधिक उपयोग होता था किन्तु आज कल मेडिकल पर ही मिलती है। और बस घर में हर हिन्दुओं के घर में तुलसी के पौधे को लगाया जाता है ।आज दवाई के रूप में टैबलेट इंजेक्शन कैप्सूल आदि आ गए है अंग्रेजो के भारत आने से पहले ऐसा नहीं था तब वैध जी होते थे और उनकी देसी दवाइयां । तो साथियों आज मै आपको विस्तार से एक महत्वपूर्ण दवाई और अध्यात्म की दृष्टि से भारत के हिन्दुओं के घर में पूजा जाने वाली तुलसी के बारे में बताऊंगा । पुरातन काल में तुलसी के निरंतर प्रयोग से ऋषियों मुनियों ने अनुभव किया था यह वनस्पति एक नहीं सैकड़ों छोटे बड़े रोगों में लाभ देने वाली है । इसके द्वारा घर का उसके आसपास का वातावरण भी शुद्ध रहता है और स्वास्थ्य वृद्ध हो जाता है । तो उन्होंने इसका विभिन्न प्रकार से प्रचार प्रसार किया था । उन्होंने कहा था कि प्रत्येक घर में एक तुलसी का पौधा होना चाहिए।  और उसकी देखभाल प्रेम से करे इसको उन्होंने धमे कर्तव्य बताया था। ऋषियों मुनियों ने धार्मिक स्थानों मंदिरों को तुलसी कानून बनाने की सलाह भी दी थी । जिसका प्रभाव दूर तक वातारण पर पड़े । धीरे धीरे तुलसी के स्वास्थ्य प्रदायक गुणों और सात्विक प्रभाव के कारण तुलसी की इतनी लोकप्रियता हो गई के लोग भक्ति भाव से की दृष्टि से तुलसी को देखने लगे और तुलसी को पूज्य माना जाने लगा । “मुख्य बात है कि जिस वस्तु का उपयोग श्रद्धा और विश्वास से किया जाता है उसका प्रभाव बहुत शीघ्र और अधिक दिखलाई पड़ता है हमारे यहां भारत के वैधक ग्रन्थों में कई स्थानों पर चिकित्सा कार्य करते हुए  जड़ी बूटी संग्रहण करते समय उनकी पूजा करने का विधान बताया गया है और यह भी लिखा गया है उनको अमुख तिथियों और नक्षत्रों में तोड़ कर या काट कर लाया जाए। इसका कारण यही है कि इस मानसिक भावना के साथ बनाई गई हुई औषधीय लापरवाही की दवाई से अधिक आराम देती है हम यहां किसी प्राइवेट की बेजती नहीं कर रहे है बल्कि बताया जा रहा है कोई भी काम लापरवाही से नहीं होता है “अब बात करते हुए तुलसी के लाभ की तो आइए जानते है तुलसी देवी क्या क्या कर सकती है ।आज मै आपको खासी झुकाम के 20 तरीके बताऊंगा जाने ।  1. तुलसी केवल शारीरिक व्याधि को ही दूर नहीं करती है बल्कि मनुष्य के आंतरिक भावो और विचारों पर भी कल्याण करती है ।2. यदि सुबह दोपहर शाम तुलसी का सेवन किया जाए तो काया सुद्घ हो जाती है 3. तुलसी की गंध वायु के साथ जहा तक जाती है वहा तक रहने वाले प्राणी पवित्र कर निर्विकार हो जाते है। 4.हिन्दू धर्म के अनुसार तुलसी में सभी देवताओं का निवास रहता है। 5.तुलसी हिचकी खासी विष विकार पसली के दर्द को मिटा देती है । 6.तुलसी से पित्त की वृद्धि और दूषित कफ और वायु का शमन होता है। 7. झुकाम के कारण आने वाले जवर में तुलसी के पत्तो का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए। 8.तुलसी के हरे पत्ते एक छतांग और काली मिर्च आधा छतांग दोनों को मिलाकर एक साथ पीस कर छोटी गोली बनाकर छाया में सुखा लें । फिर इनमें से दो गोलियां तीन तीन घंटे के अंतराल पर पानी के साथ लेने से मलेरिया अच्छा होता है ।9.पुदीना और तुलसी के पत्तो का रस एक एक तोला मिलाकर इसमें खांड मिला ले उससे हल्का भुखार उत्र जाता है। 10. तुलसी के पत्ते और काले सहजन के पत्ते मिलकर पीस ले उस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ ले विषम जवर दूर हो जाता है।11. शीत जवर में तुलसी के पत्ते पुदिना अदरक तीनों आधा तोला लेकर काढ़ा बनाए और पिए आराम होगा। 12. साधारण खासी में तुलसी के पत्ते और अडूसा के पत्तो का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से जल्दी लाभ होता है। 13.तुलसी के बीज गिलोय सौट कटेरी की जड़ समान भाग में पीस कर छान ले इसमें से आधा माशा चूर्ण शहद के साथ खाने से खासी में लाभ होता है। 14. कुकर खासी में तुलसी मंजरी और अदरक को बराबर लेकर पीसकर मिलाकर चटें तो लाभ होगा । 15. छोटे बच्चो की खासी में तुलसी की पत्ती 4 रत्ती और क्कड़ा सिंघी और अतिश दो दो रत्थी शहद में मिलाकर मा के दूध के साथ देने से फायदा होता है।16.तुलसी का रस और मुलहठी  का सत मिलकर चाटने से खासी दूर होती है। 18.तुलसी के कसौंदी कि पत्ती का रस मिलाकर सेवन करने से खासी में लाभ होता है।19. चार पांच लौंग भूनकर तुलसी के साथ लेने से खासी में लाभ होता है। 20. सूखी खासी बैठ गई हो मतलब गला बैठ गया हो तो तुलसी पत्र खसखस और मुलहठी पीसकर समान भाग में लेने लाल भुरा या खण्ड मिलाकर गुनगुने पानी पीने के साथ सेवन करे उचित लाभ होगा।

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