Site icon GoFuFa

तुलसी के लाभ

table of content

नशा दूर करे

गले क दर्द से मुक्ति

बवासीर मे लाभ

1. किसी भी प्रकार के विष जैसे अफीम कुचला धतूरा आदि खा जाने पर तुलसी के पत्तो को पीसकर गाय के घी में मिलाकर पीने से आराम होता है घी की मात्रा अवस्था के अनुसार पाव भर से आधा सेर तक हो सकती है एक बार में आराम ना होवे तो बार बार तुलसी घरत पिलाना चाहिए ।

2. तृषा रोग में तुलसी के रस में नींबू तथा मिश्री मिलाकर और थोड़ा पानी डालकर शर्बत की तरह सेवन करने से लाभ प्राप्त होता है । 

3.दिन में दो बार विशेष कर अधे घंटे के बाद तुलसी के चार पांच पत्ते चबा लेने से मुंह से दुर्गन्ध आना बन्द हो जाता है।

 4.चारपाई में खटमल हो जाने पर वन तुलसी की डाली पर रख देने से ये भाग जाते है इन डालो को घर में रखने से मच्छर चंचुंद्र व सांप नहीं आते है ये सब जीवन वनसतुलनी किं गन्ध को सहन नहीं कर सकते है।

 5. छाती पेट पिंडलियों में जलन का अनुभव होने पर तुलसी की पत्ती और देवदरू की लकड़ी घिसकर चंदन की तरह लेप कर देना चाहिए लाभदायक होता है।

6. गले के दर्द में तुलसी के पत्तो का रस शहद में मिलाकर चाटना चाहिए।

 7.पेचिस मरोड़ और पेट में आओ आने की शिकायत होने पर तुलसी पत्र को सुखा दो माशा काला नमक आधा पाव दही में मिलाकर सेवन करना चाहिए।

8. बवासीर के लिए तुलसी की जड़ तथा नीम की निंबोरियो की मिंगी समान भाग लेकर पीसकर चूर्ण बना लें इसमें 3 माशा प्रतिदिन छाछ के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है ।

9.पेट में तिल्ली बढ़ जाने पर तुलसी की जड़ नौशादर भूना सुहागा और जवाखार बराबर समान भाग में पीसकर चूर्ण बना लें इसमें2 3 माशा ताजा पानी सुबह खा लेने से आराम होता है।

10.देह में पित्ती उठ जाने पर तुलसी के बीज के 2 माशा अवला के मुररबे के साथ मिलकर सेवन करना चाहिए।

11.पसली में सर्दी का दर्द उठ जाने पर तुलसी की पत्ती का रस का 5 मशा और पोहकर मल का चूर्ण 3 माशा मिलकर गरम करके दर्द के स्थान पर लेप करे।

12.नेहरू या नेहरुआ की बीमारी में सूजन के साथ उसके स्थान पर तुलसी की जड़ को घिसकर लेप करना चाहिए इससे कीड़े का 2 3 इंच लम्बा भाग बाहर निकाल जाएगा उसको बांध के अगले दिन फिर इससे लेप करें इस तरह 2 3 दिन में पूरा कीड़ा बाहर निकाल जाएगा और कुछ समय तक लेप करते रहे घाव बिल्कुल ठीक हो जाएगा ।

13वन तुलसी के पत्ते हैजे में आश्चर्यजनक प्रभाव दिखलाते है। पत्तो के बीज की गिरी नीम की छाल अपामार्ग मतलब ओंगा के बीज गिलोय इंद्रजो इन सबको मिलाकर दो तीन तोला और तीन पाव पानी में पकावे जब आधा रहे जाए तो तीन तोला की मात्रा थोड़ी थोड़ी देर में देता चला जाए इस प्रयोग से हैजा के कठिन रोगियों की जीवन रक्षा भी प्राय हो जाती है।

Exit mobile version