Homeदेसी दवाईmedicines

तुलसी से खाज खुजली दूर करे

तुलसी में सोधक और कीटाणु नाशक गुण विशेष रूप से होते है ।आधुनिक खोजो के अनुसार उसमे एक उदनशिल तेल रहता है । जिसकी गंध से कई प्रकार के हानिकारक कीट

तुलसी के लाभ
आंवले का मुरब्बा में सफेद हो गया है क्या कारण है?
वीर्य रक्षा कैसे करे और शारीरिक बल प्राप्त करे कैसे ?

तुलसी में सोधक और कीटाणु नाशक गुण विशेष रूप से होते है ।आधुनिक खोजो के अनुसार उसमे एक उदनशिल तेल रहता है । जिसकी गंध से कई प्रकार के हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते है चरक के विष चिकित्सा में तुलसी का उल्लेख कई स्थानों  पर किया गया है ।इसमें जतुघ्न तथा विषग्न गुण बतलाए गए है ।ततैया और बिच्छू आदि के काटने पर तुलसी पत्र का प्रयोग किया जाता है। घाव पर तुलसी के सूखे पत्तो का चूर्ण छिड़कने से वे गंदे नहीं होते है । और शीघ्र भरते है । पत्तों के काढ़े से धोना भी लाभदायक होता है । त्वचा के सभी रोगों से जैसे दाद खाज़ झाई मुंहासे आदि पर इसका प्रयोग कर देने से इसकी शक्ति बहुत बढ़ जाती है।और रोग अपेक्षा कृत शीघ्र ठीक हो जाता है।इस प्रकार के घाव और फोडो पर तुलसी का प्रयोग बहुत लाभदायक होता है। तुलसी की लकड़ी को चंदन की तरह घिसकर फोडो पर लेप करने से शीघ्र आराम हो जाता है। तुलसी पत्र के काढ़े से धोने पर भी फोडो और घावों में लाभ होता है। अगर घावों में कीड़े पड़ गए हो। तो वह बदबू करता हो तो तो उसे काढ़े से धोने के बाद उस पर सूखे पत्ते  चूर्ण छिड़क देना चाहिए।
1. तुलसी के पत्तो को नीबू के रस में पीसकर दाद पर लगाने से आराम होता है ।2.तुलसी का रस दो भाग और तिली का तेल एक भाग मिलाकर मंद आग पर पकाएं ठीक पक जाने पर छान्न ले इसके प्रयोग से खुजली और चर्म रोगों में लाभ होता है।3.अग्री से जल जाने पर तुलसी का रस और नारियल का तेल फेटकर लगाने से जलन मिट जाती है। यदि फफोला पड़ गया हो या घाव हो तो शीघ्र ठीक हो जाता है।4.तुलसी के पत्तो को गंगाजल में पीसकर निरंतर लगाते रहने से सफेद दाग कुछ समय ठीक हो जाता है।5. बॉलतोड पर तुलसी पत्र और पीपल की कोमल पत्तियां पीसकर लगाने से आराम होता है।6. नाक के भीतर फुंसी हों जाने पर तुलसी पत्र और बेर को पीसकर सुघने और लगाने से लाभ होता है।7.पेट की भीतर फोड़ा या गुल्म में तुलसी पत्र तथा बेर को पीसकर सुघने और लगाने से लाभ होता है।8. पेट के भीतर फोड़ा या गुल्म में तुलसी पत्र और सोया के शाक का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा सैंधा नमक मिलाकर पीना चाहिए ।9.तुलसी पत्र और फिटकरी को खूब पीसकर बारीक करके घाव पर छिड़कने से शीघ्र ठीक हो जाता है।10. बालो को झड़ना और असमय सफेद हो जाना भी चर्म विकार ही है । इसके लिए तुलसी पत्र और सूखे आंवले का चूर्ण सिर में अच्छी तरह मिलाकर सामान्य तापमान के पानी में धोना चाहिए।11. कांख के फोड़ों पर तुलसी पत्र राई गुड गूगल समान मात्रा में पानी में पीसकर गर्म करके बांधने से वह फुटकर ठीक हो जाता है ।12.तुलसी के पत्तो और जड़ में कीटाणुनाशक गुण विशेष रूप से पाया जाता है उसका सर्व प्रकार से चर्म रोगों में प्रयोग लाभदायक सिद्ध होता है ।तुलसी के 20 25 तोला पत्तो को पीसकर पानी मिलाकर उसका रस निकाल ले फिर  अधा सेर रस तथा तिली का तेल मिलाकर आग पर पकाएं पानी जल जाने पर तेल को छानकर बोतल में भर दिया जाए इस तेल की मालिश से त्वचा संबंधी रोग खुजली खुस्की आदि दूर हो जाता है। उपयुक्त तेल के प्रयोग के साथ सुबह के काल में तुलसी की की जड और सोठ का चूर्ण कुछ गरम पानी के साथ लगातार सेवन करते रहने से कोढ़ जैसा भयंकर रोग भी दूर जाता है ।13.तुलसी में रक्त साफ करने का भी गुण होता है इसका प्रयोग सब प्रकार के खून फीसद के रोगी फोड़े फुंसी खाल पर चक्ता पड़ना आदि को दूर करने के लिए किसी तांबे के बरतन में आधा  पाव नींबू का रस भर दे फिर तुलसी और काली कसोदी में से प्रत्येक का उतना ही रस मिला दे बरतन को  को धूप में रखने से रस सूखने लगने लगा तो कई दिन मै सूखकर जब यह गाढ़ा हो जाए तो चेहरे पर लगाने से झाई मुंहासे काले दाग धब्बे मिटरकर चेहरा साफ हो जाता है और सुंदर हो जाता है ।14.तुलसी के पत्तो को नींबू के रस में मिलाकर लगते रहने से दाद मिट जाता है ।15.तुलसी और नीम के पत्तों को दही में पीसकर लगाने से भी दाद ठीक हो जाता है ।

COMMENTS

WORDPRESS: 1
DISQUS:
%d bloggers like this: