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त्रिबंध किसे कहते है ?

त्रिबंध तीन प्रकार के होते है । 1. मूलबंध 2. उड्डीयानबंध 3. जालंधरबंध 1. मूलबंध क्या है ? शौच आदि से स्नान आदि से निर्वत्त हो कर आसन

योगासन कैसे करे
पद्मासन या कमलासन कैसे करे ?
केवली कुंभक

त्रिबंध तीन प्रकार के होते है ।

1. मूलबंध

2. उड्डीयानबंध

3. जालंधरबंध

1. मूलबंध क्या है ? शौच आदि से स्नान आदि से निर्वत्त हो कर आसन पर बैठ जाए । बाई एडी के द्वारा सिवन या योनि को दबाए दाहिनी एडी सीवन पर रखे । गुदा द्वार को सिकोड़कर भीतर की और उपर खींच ले । यह मूलबंध कहा जाता है ।

लाभ :- मूलबंध के अभ्यास से मृत्यु को जीत सकते है । शरीर मे नयी ताजगी आती है और बिगड़े हुए स्वास्थ की रक्षा होती है । ब्रह्मचर्य का पालन करने में मूलबंध सहायक सिद्ध होता है वीर्य को पुष्ठ करता है । कब्ज़ को नष्ट करता है । जठराग्नि तेज होती है । मूल बंध से चिरयौवना प्राप्त होता है । बाल सफेद होने से रुकते है

अपनवायू उर्ध्वगती पाकर प्राणवायु के साथ सुसुष्मना में प्रविष्ट होती है । सहस्रा चक्र में चित्त वृत्ती स्थिर बनी रहती है । इससे शिव पद का आनंद मिलता है सर्व प्रकार की दिव्य विभूतियां और ऐश्वर्य प्राप्ति होती है । अनाहत नाद में सुनने को मिलता है । प्राण अपान नाद ओर बिंदु एकत्र होने से योग में पूर्णत प्राप्ति होती है ।

उड्डीयान बंध :-

आसन पर बैठ कर पूरा श्वास बाहर निकाल दे । सम्पूर्ण रेचक करे । पेट को भीतर से खोदकर ऊपर की ओर खींच लेना भी तथा आते पीठ की तरफ दबाए शरीर को थोड़ा सा आगे की और जो झुकाए यह है उड्डीयान बंद है

लाभ इसके अभ्यास से चिरयौवना प्राप्त होता है मृत्यु पर विजय प्राप्त होती है ब्रह्मचर्य के पालन में खूब सहायता मिलती है स्वास्थ्य सुंदर बनता है कार्य शक्ति में वृद्धि होती है

न्यौली तथा उड्डीयान बन्ध जब एक साथ किए जाते हैं तब कब्ज दुम दबाकर भाग खड़ा होता है पेट के तमाम अवयवों की मालिश हो जाती है पेट की अनावश्यक चर्बी उतर जाती है

जालंधर बंध:-
आसन पर बैठकर पूरा करें कुंभक करें और थोड़ी को छाती के साथ दबाए इसको जालंधर बंध का जाता है

लाभ :-

जालंधर बंध के अभ्यास से प्राण का संचरण ठीक से होता है पीड़ा और पीड़ा पिंगला नाड़ी बंद होकर प्राण अपान सुषुम्ना में प्रविष्ट होते हैं नाभि से अमृत प्रकट होता है
जिसका पान जट रागनी करता है योगी इसके द्वारा अमृता प्राप्त करता है पद्म आसन पर बैठ जाएं पूरा श्वास बाहर निकालकर मूलबंध उड्डीयान बंध करें

फिर खूब पूरक करके मूलबंध और उद्दियान बंध जालंधर बंध यह तीनों बंद एक साथ करें आंखें बंद रखें मन में ओम का अर्थ के साथ जप करें

इसका प्रकार प्रणाम सहित तीनों बंद का एक साथ अभ्यास करने से बहुत लाभ होता है और प्राय चमत्कारिक परिणाम आता है केवल तीन ही दिन के समय का अभ्यास से जीवन में क्रांति का अनुभव होने लगता है कुछ समय के अभ्यास से केवल या केवल कुंभक स्वयं प्रकट होता है

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