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पवनमुक्तासन के फायदे पवनमुक्तासन कैसे करते हैं पवनमुक्त आसन के प्रकार पवनमुक्तासन क्या होता है

शरीर में स्थित पवन यह आसन करने से मुक्त होता है इससे इसको पवनमुक्तासन कहां जाता है ध्यान मणिपुर चक्र में सांस पहले पूरक फिर कुंभक और रेचक

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शरीर में स्थित पवन यह आसन करने से मुक्त होता है इससे इसको पवनमुक्तासन कहां जाता है

ध्यान मणिपुर चक्र में सांस पहले पूरक फिर कुंभक और रेचक

विधि :भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जाएं पूरा करके फेफड़ों में सांस भर ले

अब किसी भी एक पैर को घुटने से मोड़कर दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाकर उसके द्वारा मोड़े हुए घुटनों को पकड़कर पेट के साथ लगा दे

फिर सिर को ऊपर उठाकर मोड़ें हुए घुटनों पर नाक लगाए दूसरा पैर जमीन पर सीधा रहे
इस क्रिया के दौरान सांस को रोककर कुंभक चालू रखे । सिर और मोड़ा हुआ पैर भूमि पर पूर्व वत रखने के बाद ही रेचक करे ।

दोनों पैरो को बारी बारी से मोड़कर यह क्रिया करे । दोनों पैर एक साथ मोड़कर भी आसन हो सकता है ।

लाभ :- पवनमुक्तसन के नियमत अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है ।

पेट की वायु नष्ट होकर पेट विकार रहित बनता है कब्ज दूर होती है पेट में अफरा हो तो इस आसन से लाभ होता है प्रात काल में शौच क्रिया ठीक से नहीं होती हो तो तो थोड़ा पानी पी कर यह आसन 15 20 बार करने से शौच खुल कर आता है ।

इस आसन से स्मरण शक्ति बढ़ती है ।

डॉक्टर वकील साहित्यकार विद्यार्थी बौद्धिक कार्य करने वाले को यह आसन करना चाहिए ।

बैठकर कार्य करने वाले जैसे व्यपारी मुनीम आदि लोगो को को नियमित रूप से पवनमुक्तसन करना चाहिए ।

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