HomeLifestyle

मन की शांति कैसे पाए

मन की शांति पाने के कई उपयोगी तरीके है 1. संतुष्टि । 2. ईश्वर पर भरोसा रखें । 3. आश्वस्त रहे । 4.विवेकी बने । 5. संयमी बने ।

Give goal to your mind
आशावादी कैसे बने
Life journey with old and culture

मन की शांति पाने के कई उपयोगी तरीके है

1. संतुष्टि ।

2. ईश्वर पर भरोसा रखें ।

3. आश्वस्त रहे ।

4.विवेकी बने ।

5. संयमी बने ।

तो अब मै आपको विस्तार पूर्वक बताऊंगा और समझाऊंगा के आप अपने मन को कैसे समझा सकते है मन एक दिमाग संरचना नहीं है ये तो विचारो का संगम है जो हमारी सोच के सहारे चलता है आपने खुद देखा है

हमेशा मन के विचार ही किसी व्यक्ति को कुछ गलत या सही करने को तत्पर रखते है।जीवन अनिश्चितता का संगम है कभी खुशियों का मेला आता है कभी दुखो का पहाड़ टूट पड़ जाता है ।सबसे बड़ी बात ये है के आप हमेशा खुद एक अडिग वृक्ष की भांति खड़े रहे विचलित ना हो संयमी रहे तो सफलता आपकी ही होगी ये भी तो निश्चित है ।

तो सबसे पहले दोस्तो मै आपको बताता है पहला पड़ाव क्या है संतुष्टि :- हमेशा खुद से जो भी आप कर रहे है जितना भी कमा रहे है संतुष्ट रहे संतोष से जीवन जिए सोचे प्रभु ने जितना दिया है उतना ही बहुत है संतोषी भाव मन में पैदा करे उचित लाभ होगा विकार दूर होंगे चिंता घट जाएगी।

ईश्वर पर भरोसा रखें :-

जो भी कार्य हो नौकरी हो लगन हो धन संबंधी बात हो हमेशा अपने कर्म को ईश्वर को अर्पित कर दे बाकी फल की चिंता ना करे जो भी होगा अच्छा ही होगा कर्म का सत कर्मो का फल अच्छा ही मिलता है ।

आश्वस्त रहे :-

हमेशा ये सोचे कि जो भी आपने अभी तक किया है और जो आगे करेंगे उसमे संदेह ना पैदा करे जब आप सत्य कर्म और ईश्वर अनुमति से सारे काम करते है तो फिर चिंता कैसी ।

विवेक :

विवेक के अर्थ लोग अपनी समझ के अनुसार समझ से लगा लेते है विवेकी मनुष्य हवा की चाल तो को समझ सकता है अच्छा बुरा का ज्ञानी तक हो जाता है उसे पता होता है क्या ठीक है और क्या नहीं है तो विवेकी बने रहे ।

संयमी बने रहे :-

संयम रखने वाले व्यक्ति उचित समय पर अपना हर निर्णय लेते है कुंठा नहीं पालते है अक्सर कोई भी काम करने से पहले संयम रखते है अच्छी तरह सोच विचार कर निर्णय लेते है जिनसे उनको कोई परेशानी और दिक्कत नहीं होती है जीवन सुचारू रूप से चलता है

। तो इन कारणों को विचारो को अपना कर एक आदर्श जीवन जी सकते है जो लाभप्रद जीवन जीने की कला है उसमे ये कोई दोराय नहीं है कि आप तार्किक नहीं हो सकते है तार्किक भी होना अच्छा होता है इससे बुध्दि का विकास होता है। 

COMMENTS

WORDPRESS: 3
DISQUS:
%d bloggers like this: