Homeदेसी दवाईmedicines

वीर्य रक्षा कैसे करे और शारीरिक बल प्राप्त करे कैसे ?

तुलसी के बीज अधिक लसदार और लेपक होते है । और मूत्र संस्थान के विकारों में दिए जाते है। तुलसी की जड़ को भी बहुत अधिक स्तभन गुण युक्त बतलाया जाता ह

तुलसी के लाभ
आंवले का मुरब्बा में सफेद हो गया है क्या कारण है?
तुलसी करे निरोगी

तुलसी के बीज अधिक लसदार और लेपक होते है । और मूत्र संस्थान के विकारों में दिए जाते है। तुलसी की जड़ को भी बहुत अधिक स्तभन गुण युक्त बतलाया जाता है। ये बीज बहुत जल्द लुवाव छोड़ते है। और थोड़ी ही देर में लसदर झिल्ली के रूप में बदल जाते है। इसलिए इनको गुड जैसी किसी चीज में मिलाकर खाएं जाते है। और पानी में घोलते है। और पीते है। वैसे तुलसी पत्ते भी वीर्य दोषों को मिटाने में बहुत उपयोगी है। 1.तुलसी की जड़ को बारीक पीसकर सुपाड़ी की जगह पान में रखकर खाया जाए तो वीर्य पुष्ठ होता है। और स्तबन शक्ति बढ़ती है। 2.तुलसी के बीज या जड का चूर्ण पुराने  गुड में मिलाकर 3 माशा प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करने से पुरुषत्व की वृद्धि होती है। 3.तुलसी के बीज 5 टोला मूसली 4 टोला मिश्री 6 तोला लेकर पीसकर मिला ले ।इस चूर्ण को प्रतिदिन 3 माशा गाय के दूध के साथ सेवन करने से वीर्य संबंधी निर्बलता में आशाजनक सुधार होता है। 4. सुजाक की बीमारी में तुलसी के बीज छोटी इलायची के दानों और कलमी शोरा समान भाग मिलकर पीस ले।इस चूर्ण को दो तीन रत्ती खा कर दूध से दुगुना पानी मिली हुई लस्सी जितनी पी जा सके उतने पानी पीने से बहुत लाभ होता है लस्सी में चीनी आदि कोई चीज नहीं मिलनी चाहिए। 5.उपदंस रोग में तुलसी के बीज पानी में महिन पीसकर लुगदी बना ले इससे दुना नीम के तेल लेकर दोनों को आग पर पकाओ जब लुगदी जलकर  काली पड़ जाए। तब उसे छानकर तेल को ठंडा कर ले। और उपदंस के घावों पर लगाए। यह तेल अन्य प्रकार के घावों पर भी बहुत लाभ पहुंचाता है।6.मूत्र दाह की शिकायत में पाव भर दूध और डेढ़ पाव पानी मिलावे और उसमे तोला तुलसी पत्र का रस डालकर पी जाए। 7.वीर्य की निर्बलता के लिए  तुलसी के बीज नो रत्ती और खांड का पुराना शिरा 1 रत्ती मिलाकर प्रात शाय शेवन करे ।8. रात को  तुलसी के 6 माशा बीज पाव भर पानी में भिगो दे और सुबह उनको खूब मिलाकर ठंडाई की तरह पी जाए इसके लगातार सेवन से प्रमेह धातु क्षीणता मूत्र क्रिछ में लाभ होता है 9.तुलसी कटू तिक्त  हृदय के लिए हितकर त्वचा के रोगों में लाभदायक पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली यह कफ और वात संबधी विकारों को ठीक करती है। 10.आयुर्वेद के ज्ञाता ने समस्त औषधियों और जड़ी बूटियों के गुण जानने के लिए नीघटू ग्रन्थों की रचना की थी । उसमे भी तुलसी के गुण विस्तार पूर्वक बताए गए है तो तुलसी एक बहुत लाभप्रद औषधि है 

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS:
%d bloggers like this: