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शवासन क्या है ? किसे कहते है

Table of content शवासन क्या है विधि लाभ शवासन की पूर्ण अवस्था में शरीर के तमाम अंग एवं मस्तिष्क पूर्णता चेष्टा रहित किए जाते हैं यह

योगासन कैसे करे
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त्रिबंध किसे कहते है ?

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शवासन क्या है

विधि

लाभ

शवासन की पूर्ण अवस्था में शरीर के तमाम अंग एवं मस्तिष्क पूर्णता चेष्टा रहित किए जाते हैं यह अवस्था सब मुर्दे जैसी होने से इस आसन को शवासन कहा जाता है ध्यान संपूर्ण शरीर पर श्वास दीर्घ

विधि :-बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जाएं दोनों पैरों को परस्पर थोड़ा अलग कर दें दोनों हाथ भी शरीर से थोड़े अलग रहें इस प्रकार पैरों की ओर फैला दें हाथ की हथेली आकाश की तरफ खुली रखें सिर सीदा रखे आंखें बंद
मानसिक दृष्टि से शरीर को पैर से सिर तक देखते जाएं पूरे शरीर को मुर्दे की तरह ढीला छोड़ दें हर एक अंग को शिथिल करते जाएं शरीर में संपूर्ण विश्राम का अनुभव करें मन को भी ब्राह्म विषयों से हटाकर एकाग्र करें

बारी-बारी से हर एक अंग पर मानसिक दृष्टि एकाग्र करते हुए भावना करें वह अब आराम पा रहा है मेरी सब थकान उतर रही है

इस प्रकार भावना करते-करते सब स्नायुओं को शिथिल होने दें शरीर के एक भी अंग में कहीं भी तनाव टेंशन नहीं रहे

शिथिलीकरण की प्रक्रिया में पैर से प्रारंभ करके सिर तक जाएं अथवा सिर से प्रारंभ कर के पैर तक भी जा सकते हैं अंत में जहां से प्रारंभ किया हो वही पुन्य पहुंचना चाहिए शिथिलीकरण की प्रक्रिया से शरीर के अंगों को एवं ज्ञान तंतुओं को विश्राम की अवस्था में ला देना है

शवासन की दूसरी अवस्था में श्वास पर ध्यान देना है शवासन की यही मुख्य प्रक्रिया है विशेषकर योग साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी है केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रथम भूमिका पर्याप्त है

इसमें श्वास और उसकी नियमितता दीर्घा और समानता स्थापित करने का लक्ष्य है नियमित चले लंबा और गहरा चले और आज एक समान रहे तो मन को एकाग्र करने की शक्ति प्राप्त होती है

शवासन यदि ठीक से किया जाए तो नाड़ी तंत्र इतना शांत हो जाता है अभ्यासी को नींद आने लगती है लेकिन ध्यान रहे नींद रत्नाकर जागृत रहना आवश्यक है अन्य आसन करने के बाद अंगों में जो तनाव टेंशन पैदा होती है

उस को शिथिल करने के लिए अंत में 3 से 5 मिनट तक शासन करना चाहिए दिन भर में अनुकूलता के अनुसार दो-तीन बार शवासन कर सकते हैं

सब आसन के लाभ क्या क्या है

शवासन के द्वारा सुनाइए एवं मांसपेशियों के शिथिलीकरण से शक्ति बढ़ती है अधिक कार्य करने की योग्यता उनमें आती है रक्त वाहिनी में रक्त करवाओ तेरे को होने से सारी थकान उतर जाती है नाड़ी तंत्र को बल मिलता है मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है रक्त का दबाव कम करने के लिए नाड़ी तंत्र की दुर्बलता एवं उसके कारण होने वाले रोगों को दूर करने के लिए शासन को उपयोगी है

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