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स्वर्गासन करने का अनोखा तरीका

भूमि पर सोकर समग्र शरीर को ऊपर उठाया जाता है इसलिए इसको सर्वांगासन कहते हैं । ध्यान विशुद्ध ख्य चक्र के में श्वास रेचक पूरक और दीर्घावधि https://

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भूमि पर सोकर समग्र शरीर को ऊपर उठाया जाता है इसलिए इसको सर्वांगासन कहते हैं ।

ध्यान विशुद्ध ख्य चक्र के में श्वास रेचक पूरक और दीर्घावधि https://gofufa.org/yoga-for-beginners-yoga-crossword-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-yoga-class/03/31/19/597/yoga-information/adityapundir/19/14/2021/

विधि :- भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जाएं श्वास को बाहर निकालकर अर्थात रेचक करके कमर तक के दोनों पैर सीधे और परस्पर लगे हुए रखकर ऊपर उठाएं फिर पीठ का भाग भी ऊपर उठाएं दोनों हाथों से कमर को आधार दे हाथ की कुहनिया भूमि से लगी रहे ।

गर्दन और कंधे के बल पर पूरा शरीर ऊपर की ओर सीधा खड़ा कर दें थोड़ी छाती के साथ चिपक जाए। दोनों पैर आकाश की ओर रहे दृष्टि दोनों पैरों के अंगूठे की ओर रहे अथवा आंखें बंद करके चित्तवृत्ति क कंठ प्रदेश में और विशुद्धआंख्या चक्र में स्थिर करें।

पूरा करके श्वास को धीरे सामान्य चलने दे ।

इसका इस आसन का अभ्यास दृढ़ होने के बाद दोनों पैरों को आगे पीछे झुकाते हुए जमीन को लगाते हुए अन्य आसन भी हो सकते हैं स्वर्गासन की स्थिति में दोनों पैरों को जांघों पर लगाकर पद्मासन भी किया जा सकता है

प्रारंभ में 3 से 5 मिनट तक है आसन करें अभ्यासी 3 घंटे तक इस आसन का समय बढ़ा सकता है

लाभ:- स्वर्गासन के नित्य अभ्यास से जठराग्नि तेज होती है साधक को अपनी रूचि के अनुसार भोजन की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

शरीर की त्वचा में झुर्रियां नहीं पड़ती बाल सफेद हो कर गिरते नहीं हर रोज एक पहर तक सर्गासन का अभ्यास करने मृत्यु पर विजय मिलती हैं

शरीर में तेज बढ़ता है तीनों दोषों का शमन होता है व्यक्ति होता है मेघा शक्ति बढ़ती है जीवन की प्राप्ति होती है इस आसन से थायराइड ग्रंथि की शक्ति बढ़ती है वहां रक्त संचार तेज में होने लगता है इससे उसे पोषण मिलता है थायराइड के रोगी को इस आसन से अद्भुत लाभ होता है

लीवर और प्लीहा के रोग दूर होते हैं स्मरण शक्ति बढ़ती है ऊपर से मुंहासे दाग दूर होकर उक्त से बनता है नीचे उतरी भी आते अपने मूल स्थान पर स्थिर होती हैं पुरुषार्थी पर सरवन का अच्छा प्रभाव पड़ता है सपन दोष दूर होता है मानसिक बुद्धि पर्वती करने वालों को विशेषकर विद्यार्थियों को यह आसन अवश्य करना चाहिए

मंदाग्नि अजीर्ण कब्ज थायराइड का अल्प विकास थोड़े दिनों का अपेंडिसाइटिस साधारण गाठ अंगविकार असमय आया हुआ वरिष्ठ बुढ़ापा दमा ,कफ चमड़ी के रोग रक्तदोष के रोग को दूर करता है

स्त्रियों को मासिक धर्म की अनियमितता एवं दर्द मासिक अथवा अधिक आना इत्यादि रोगों में इस आसन से लाभ होता है

नेत्र और मस्तिष्क की शक्तियां बढ़ती हैं उनके होते हैं थायराइड के अति विकास वाले खूब कमजोर हंसने वाले और अत्यधिक छवि वाले लोगों को भी किसी अनुभवी की सलाह लेकर ही स्वर्गासन करना चाहिए शासन करने से जो लाभ होते हैं वह सब स्वर्गासन और प्रशासन करने से मिल जाते हैं शीर्षासन में गलत होने से जो हानि होती है बस यहां आने की संभावना स्वर्गासन और बाद पड़पश्चिमतो आसन में नहीं है

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