सड़क

हमेसा चलती रहती है मिलो लम्बी होती है। कुछ भी हो रहा हो देश दुनिया मे पर चलती ही रहती है। ना जाने कितने आते है।कितने जाते है। ये भी तो नहीं पता कौन कहा जा रहा है बस जा रहा है।

कही भी जा रहा है। दुनिया घूम लेती है सड़क खुद ही चलकर एक शहर से दूसरे शहर पहुच जाती है। ना जाने कितनो को मंजिल तक पहुचाती है सड़क। कोई सुख मे चल रहा होता है। कोई दुःख मे चल रहा होता है।

कोई सोच मे चल रहा होता है। जो ज्यादा ही तिरस्कारि सा होता है।उसको निगल भी जाती है। लील कर भी मनो शांत सी रह जाती है सड़क। मन की रड़क भी निकलती है आजकल सड़क पर। एक आवरण लेकर बाजार को समाहित कर लेती है।

ऐसी होती है सड़क पर कौन जाने कहा कहा होती है सड़क। हजार छापे पड़ती है सड़क पर फिर भी सब सहन करती जाती है सड़क। कभी रफ़्तार से चलती है। कभी धेम धीमा चलती है। फिर भी जबरदस्त चलती है। ऐसी होती है सड़क। जो अतुलनीय निर्माण करती है किसी भी देश सभ्यता का वो होती है सड़क।

न होता अगर समन्दर बिच मै तो संसार एक ही रस्ते से तो जुड़ जाता सदा क लिए