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Table of content

1.प्रत्येक व्यक्ति परेशान है

2.भारत

3.मानव मस्तिष्क

4.प्रसिद्ध दार्शनिक

1.प्रत्येक व्यक्ति परेशान है

किसी ने क्या खूब लिखा है दादा बड़े सच्चे थे सबसे यही कहते थे कुछ जहर भी होता है अंग्रेजी दवाओं में संसार में नित्य नए नए रोगों का जन्म हो रहा है तथा तन व मन रोगों का घर बनते जा रहे है हर कोई रोगी है कम से कम मानसिक हताशा दिमागी तनाव आदि के जाल में तो प्रत्येक व्यक्ति जकड़ा हुआ है ही ।

यह आज का सत्य है कि विश्व का लगभग प्रत्येक व्यक्ति परेशान है और इससे मुक्ति प्राप्त करने की ठिकाने की खोज में है । प्रत्येक व्यक्ति के रास्ते अलग अलग अलग है कोई कुछ चाहता है कोई कुछ चाहता है किसी को कॉल गर्ल या वेश्या में रुचि मिलती है और व्यक्ति अपनी धुन में खुश रहता है फिर आते है दुनिया से अलग इसके विपरीत ईश्वर की राह पर चलने वाले सच्चे राही जिन्हें अपने अपने मन्दिर और मस्जिदों में अल्लाह राम की इबादत करके खुशी मिलती है । तो सबका अपना अपना खुशी का भी नजरिया होता है।

और कोई व्यक्ति दवाओं का सहारा लेता है और बहुत से जीवन तो दवाओं की कृपया से स्थापित है अपितु वास्तव में तो वे जीवित लाशों की भांति होते है ओषधियां आज की आवश्यकता बन गई है बस अंतर यह है कि कौन कौन ओषधि का प्रयोग करता है । आधुनिक ओषधि आज की आवश्यकता बन गई है एक समय अमेरिकी वैज्ञानिकों ने काम शक्ति के लिए वियाग्रा का आविष्कार किया था तो काम के अष्कतो के मज़े आ गए तथा लोग सेक्सुअल ऑर्गेज्म में खो कर यह भी भूल गए कि यह वियाग्रा उन्हें मृत्यु की बाहों मे भी सुला सकता है और इसके विपरित प्रभाव होने लगे तो तब जाकर लोगों को अक्ल आयी और वे सुधरे ।

2.भारत

अब भारत की बात की जाए तो जबानी अपने बीमारू को आराम देना पड़ता है कुछ दवाइयां अंदर मिलती है कुछ नहीं सरकार पहुंचा भी रही होती है पर फिर भी ये को घूसखोरी होती है इसका भी तो क्या करे कुछ दवाओं का नाम लिख कर देते है जो बाहर से मिलती है तो आइए इन दवाओं के चक्कर से बच कर इस वर्तमान युग की देन विभिन्न रोगों से मुक्ति प्राप्त करने के कुछ विश्वविद्यालय गुप्त सिद्ध योगो से परदा उठाते है इन योगों को व्यक्ति बिना झिजक के इस्तेमाल कर सकता है इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और वही मिसाल सिद्ध होती है कि हिंग लगा ना फिटकरी और रंग आए बढ़िया आप भी इन सर्वविदित सिद्ध योग से लाभ प्राप्त करे रोगों से मुक्ति पाएं खुद के खुद डॉक्टर बन जाए

आज के युग में हर व्यक्ति किसी ना किसी मानसिक परेशानी से ग्रस्त है ईश्वर ना करे उसमे से आप भी हो अग्र तो प्रसिद्ध दार्शनिक डेल कार्नेगी ने लिखा है मानसिक चिकित्सक आप को यही बताएगा कि व्यस्त रहना ही रोगी स्नायु तथा परेशान मस्तिष्क का अति उत्तम उपचार है उससे उत्कृष्ट औषधि आज तक नहीं बनी है आपको आश्चर्य होगा बिजी रहना जैसी साधारण वस्तु परेशानी दूर करने में कितनी सहायक सिद्ध होगी जो अपने आप में ही गजब है

3.मानव मस्तिष्क

किसी भी मानव मस्तिष्क के लिए चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों ना हो कितना ही तीव्र क्यों ना हो बुद्धिमान क्यों ना हो एक समय में एक से अधिक वस्तुओं तथा बातो के बारे में सोचना असंभव है शायद आपको विश्वास नहीं आया हो तो फिर तो कीजिए जरा पीछे की तरफ झुककर अपने नेत्र बन्द कीजिए और चेष्टा कीजिए आप एक ही समय में आज की कोई बात तथा अगले दिन कार्यक्रम के विषय में सोच सके एक ही वक्त में आप दोनों बाते नहीं सोच सकते है ।यदि आप या मै परेशान हो तो हम कार्य को बतौर औषधि के प्रयोग कर सकते है यह शब्द हावर्ड विश्वविधालय के एक पूर्व प्रोफेसर डॉक्टर रिचर्ड सी कैबुट के है उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा था कि डॉक्टर की हैसियत से मुझे बहुत से लोगो को कार्य में व्यस्त होकर स्वास्थ्य प्राप्त करते देखने की खुशी प्राप्त हुई है । यह लोग जानलेवा रोगों से ग्रस्त थे जो संदेह व्याकुलता झिजक हिकिचाहट भय तथा असंतुष्टि की भावनाओ से ग्रस्त होने से उत्पन होते है हमें कार्य करने से जो हौसला होता है वह आत्म विश्वास की भांति होता है और जिसे इमर्सन ने स्थाई सुनहरा तथ्य समाप्त न होने वाला बना दिया है ।

4.प्रसिद्ध दार्शनिक

प्रसिद्ध दार्शनिक दार्शनिक डगलस। लिट्रन ने लिखा है हमें अपनी गलतियों से भयभीत नहीं होना चाहिए उन्हें सदैव याद रखना चाहिए हम जितना सीख सके सीखना चाहिए अगर दुख दे तो भुला देना चाहिए।

हमें आदत डालनी चाहिए कि हम हमेशा अपनी दृष्टि उची और उत्तम वस्तुओं पर रखे हमें अपनी फाश से फाश गलतियों तथा दुखद क्षणों के भीतर भी दृष्ठी सदैव भली और महान वस्तुओं पर रखनी चाहिए।

कोई बात कितनी ही अजीब या दुख वाली हो अपनी सोच हमेशा अडिग दृष्टिकोण ठीक रहना चाहिए और विश्वास रखे उचित लाभ होगा। अपनी गलती से एक पाठ प्राप्त कीजिए विश्व के बुद्धिमान लोग यही करते है।