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River of India with holy Hindu culture

Table of content 1.गंगा नदी 2.यमुना नदी 3.नर्मदा नदी 4.ब्रह्मपुत्र नदी आजकल अपनी पुरानी परंपराओं को शहरी पढ़ा-लिखा युवा वर्ग प्राय अं

Solar Eclipse of 10 june 2021

Table of content

1.गंगा नदी

2.यमुना नदी

3.नर्मदा नदी

4.ब्रह्मपुत्र नदी

आजकल अपनी पुरानी परंपराओं को शहरी पढ़ा-लिखा युवा वर्ग प्राय अंधविश्वास मान लेता हैऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो हमारे रीति-रिवाजों का उपहास करके अपने आप को आधुनिक करार देते हैं लेकिन बिना सोचे समझे किसी रीति रिवाज को गलत बताना किसी रीति रिवाज को ढकोसला कहकर उसका उपहास करना बहुत बड़ी मूर्खता है

इससे व्यक्ति भी वयस्क का दिवालियापन ही प्रकट होता है हां कोई रीति रिवाज कैसे होती है उसका महत्व क्या है जैसे प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासा शांत करना सर्वथा उचित है लेकिन इस संबंध में खासी दिक्कतें हैं

आमतौर पर लोगों को इस बात की खुद ही जानकारी नहीं होती वह इस परंपरा से क्या लाभ पाते हैं या अमुक रीति रिवाज का क्या महत्व है क्योंकि पूर्वज भी इन सब रीति-रिवाजों का पालन करते थे इसलिए मैं भी इसका पालन कर रहे हैं इस प्रकार जिज्ञासु को संतुष्टि पूर्ण उत्तर नहीं मिल पाता तब वे उनकी उपादेयता पर शंका करने लगता है

हमारा प्रयास है कि हमारे आचार नामक स्तंभ में भारत के विभिन्न रीति-रिवाजों के साथ यहां की विभिन्न परंपराओं विशेषताओं का वैज्ञानिक प्रज्ञा निक पक्ष प्रस्तुत करें ताकि आज की युवा पीढ़ी इस बात का अनुभव कर सके कि पूर्वक ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में कितनी ऊंचाई तक पहुंच गए थे

प्राचीन भारत को विश्व गुरु आखिर किन कारणों से कहा जाता था इस अंक में मैं आपको बताऊंगा और आपको कुछ विशेष जानकारी मिलेगी इस बार मैं आपको भारत में पूजनीय नदियों के महत्व का वैज्ञानिक प्रस्तुत कारण करूंगा

मां की संज्ञा देकर हमने नदियों को पूजनीय माना है आखिर भारत की नदियों में इतनी खास बात क्या है जो उन्हें इतनी गरिमा प्रदान की जाती है

1.गंगा नदी

सर्वप्रथम हम अगर गंगा नदी की बात करें तो वैज्ञानिक अनुसंधान उसे यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि गंगा गंगा की धारा जहां तक पहाड़ों से गिरती है वह जल स्वास्थ्य के लिए अमृत समान हैं उस जल में लंबी अवधि तक कीटाणु नहीं पड़ते हैं

पहाड़ों की ऊंचाइयों से गिरने तथा अघोरी तांत्रिक शक्तियों का नाम के विखंडन होने से उस आवेशित जल के प्रयोग से शरीर में नई ताजगी तथा स्पूर्ति भर जाती है और यह भी अनुभव किया गया है गंगा के सतत प्रवाह के दर्शन तथा स्पर्श मात्र से मानसिक तनाव मिट जाता है सारे दुख दर्द क्षणों में मनुष्य से दूर भाग जाते हैं

और यह भी माना जाता है गंगा का पवित्र जल मुक्ति प्रदाता है मृत्यु शैया पर पड़े मनुष्य को तुलसी पत्र के साथ गंगाजल देने का विधान है इसका कारण यह है कि उस व्यक्ति को ऑक्सीजन की मात्रा इसके माध्यम से सहज प्राप्त हो जाए और उसमें प्राण चेतना पुण्य लौट आए गंगा के आगे से जल को मंत्र और विधि से मरणासन्न व्यक्ति को दिया जाता है

यदि व्यक्ति गंगा जल लेने के बाद भी मृत्यु को प्राप्त होता है तो वह इस आवेशित जल के 5 से उसका प्रेत खंड पूर्वजों के प्रेत पिंड की और अपने आप मिल जाता है और प्राणी को मुक्ति प्राप्त हो जाती है गंगा के जल के औषधीय गुण भी हैं यह अनेक रोगों तथा हैजा आदि को नष्ट करने में सक्षम रहता है यह सॉरी विशेषताएं हमारी पतित पावन गंगा मां के अमृत में ही जल में हैं यह बड़े दुख की बात है आज हम अपने स्वार्थ बस प्रभु के द्वारा आशीर्वाद रूप में प्रदान की गई इन महान नदियों का जल प्रदूषित करते जा रहे हैं।

2.यमुना नदी

हमारे शास्त्रों के अनुसार यमुना सूर्य की पुत्री है माना गया है यमुना की जलधारा का आरंभ उसने शक्ति का केंद्र है यमुना की भी स्मारक शक्ति अद्भुत है यमुना जल में तांबा और खनिज लवणों का बाहुल्य है। इसकी वजह से इस के जल में स्नान करने से अत्यंत शांति का अनुभव होता है वही इस में घुले विभिन्न स्वास्थ्य रक्षक तत्व रोग निवारण में सहायक होते हैं मान्यता है कि यमुना में स्नान करने वालों को यमदूत पकड़ते नहीं हैं लेकिन आजकल हर तरफ यमुना में खनन करने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है जो रेत का खनन करते हैं

3.नर्मदा नदी

नर्मदा इस पवित्र नदी को दूसरी गंगा माना गया है एक और जहां इस के जल में खनिज तत्व खुले हुए हैं वहीं इसके किनारे पर बहुमूल्य जड़ी बूटियां फलती फूलती रहती हैं इन दोनों का समन्वय नर्मदा के किनारे साधना के लिए साधु-संतों को प्रेरित करता है इसका जलपान करने के कोई भी रोगों से दूर रह सकता है साधु संत इसलिए स्वस्थ रहते हुए भी दीर्घायु भागते हुए नर्मदा तट पर साधना में तल्लीन रहते आए हैं

4.ब्रह्मपुत्र नदी

फिर आती है बात ब्रह्मपुत्र नदी की इस पवित्र नदी की धारा ही ऐसी पट्टी से गुजरती है जिस की तली में पारा उपस्थित है आयुर्वेद के अनुसार पारा कायाकल्प की महत्वपूर्ण और दी है अतः इसमें स्नान करके इसके जल का पान करने से शरीर में नव स्फूर्ति का आना स्वभाविक है

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