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योगासन कैसे करे

"सर्वप्रथम मै आपको बताना चाहूंगा आप जब भी योग करे तो किसी गुरु या ट्रेनर को धारण करके उनके सामने योग करे सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है जो विभ

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“सर्वप्रथम मै आपको बताना चाहूंगा आप जब भी योग करे तो किसी गुरु या ट्रेनर को धारण करके उनके सामने योग करे सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है जो विभिन्न स्रोतों से जमा करके आपके लिए लिखी गई है”

योग कैसे करे

प्रस्तावना :-साधारण मनुष्य अन्य में प्राण में और मनोमय कोष में जीता है जीवन की तमाम सुषुप्त शक्तियों नहीं जगा कर जीवन व्यर्थ होता है इन शक्तियों को जगाने में आपको आसन बहुत आवश्यक होंगे आसन के अभ्यास से तन मन तंदुरुस्त रहेगा और मन प्रसन्न और बुद्धि तीक्ष्ण बनेगी जीवन के हर क्षेत्र में सुखद सुमन साकार करने की कुंजी आपके अंतर्मन में छुपी हुई पड़ी है आपका अद्भुत सामर्थ्य प्रकट करने के लिए रिसीव ने समाधि से सम प्राप्त इन आसनों का प्रतिपादन किया है हजारों वर्ष की कसौटी ओ में कसे हुए देश विदेश में आदरणीय लोगों के द्वारा आधार पाए हुए इन आसनों की लेखन सामग्री देखने में बड़ी छोटी होती है पर आपके जीवन को अति महान बनाने की कुंजा रखते हुए आपके हाथ में मैं आपको यह जानकारी दे रहा हूं इन आसनों का अभ्यास करके आप अपने जीवन को सुगम में बना सकते हैं

आसनों की प्रक्रिया में आने वाले कुछ शब्दों की समझ :- रेचक का अर्थ है स्वास्थ छोड़ना ।

पूरक का अर्थ है श्वास भीतर लेना।

कुंभक का अर्थ है श्वास को भीतर या बाहर रोक देना श्वास लेकर भीतर रोक लेने की क्रिया को अंतर या अभ्यांतर कुंभक कहते हैं श्वास को बाहर निकाल कर फिर वापस में ना लेकर श्वास बाहर ही रोक देने की क्रिया को बहिर कुंभक कहते हैं

चक्र :- चक्र अध्यात्मिक शक्तियों के केंद्र हैं स्थूल शरीर में चर्म चाकसू से में दिखते नहीं हैं क्योंकि वह हमारे सूक्ष्म शरीर में स्थित होते हैं फिर भी स्थूल शरीर के ज्ञान तंतुओं सुनाया यू केंद्र के साथ उनकी समानता जोड़कर उनका निर्देश किया जाता है हमारे शरीर में ऐसे सादर चक्र मुख्य हैं सबसे पहला है 1. मूलाधार चक्र गुदा के पास मेरुदंड के आखिरी मनके के पास होता है

2.दूसरा है स्वाधिष्ठान चक्र :-जननेंद्रिय से ऊपर और नाभि से नीचे के भाग में होता है 3. तीसरा है मणिपुर चक्र :- नाभि केंद्र में होता है और फिर आता है 4.अनाहत चक्र :-जो हृदय में होता है 5. विशुद्ध कंठ में होता है 6:-आज्ञा चक्र दोनों बोहों के बीच होता है। 7. सहसार चक्र :-मस्तिष्क के ऊपर के भाग में जहां चोटी रखी जाती है वहां होता है ।

नाडी :- प्राण वहन करने वाली बारीक नलिकाओं को नाड़ी कहते है उनकी संख्या 72 0000 बताई जाती है इडा पिंगला और सुषुम्ना ये तीन मुख्य है उनमें से भी सुषुम्ना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है ।

आवश्यक निर्देश :-

1.भोजन के 6 घंटे बाद दूध पीने के दो घंटे बाद या बिल्कुल खाली पेट ही आसन करे ।

2. सौच स्नानादि से निवृत्त होकर आसन किया जाए तो अच्छा है

3. स्वास मुंह से ने लेकर नाक से ही लेना चाहिए 3. गर्म कंबल टाट ऐसा ही कुछ बिछाकर आसन करें खुली भूमि पर बिना कुछ बिछाए आसन कभी ना करें जिससे शरीर में निर्मित होने वाला विद्युत प्रवाह नष्ट ना हो जाए

4.आसन करते समय शरीर के साथ जबरदस्ती ने करें आसन कसरत नहीं है अतः धैर्य पूर्वक आसन करें आसन करने के बाद ठंड में या तेज हवा में निकले स्नान करना हो तो थोड़ी देर बाद करें।

5. आसन करते समय शरीर पर वस्त्र कम से कम और ढीले होने चाहिए

6. आसन करते-करते मध्यांतर में और अंत में शावशन करके शिथिलीकरण के द्वारा शरीर के तंग बने स्नायु को आराम दे

7.आसन के बाद मूत्र अवश्य करें जिससे एकत्रित दूषित तत्व बाहर निकल जाएं

8.आसन करते समय आसन में बताए हुए चक्र पर ध्यान करने से और मानसिक जाप करने से अधिक लाभ होता है

9.आसन के बाद थोड़ा-ताजा जल पीना लाभदायक है ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित होकर संधि संस्थानों का मल निकालने में जल बहुत आवश्यक होता है

10. स्त्रियों को चाहिए कि गर्भावस्था तथा मासिक धर्म की अवधि में कोई भी “आसन “ना करें

11. स्वास्थ्य के आकांक्षी हर व्यक्ति को 5 या 6 तुलसी के पत्ते चबाकर पानी पीना चाहिए इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है एसिडिटी तथा अन्य रोगों में लाभ होता है ।

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